स्ट्रांप ड्यूटि क्या है? जब भी सुनें तो ये सवाल आता है
अगर आप प्रॉपर्टी खरीदते‑बेचते हैं या कोई बड़ा लेन‑देन करते हैं, तो ‘स्टैम्प ड्यूटी’ नाम की एक फीस अनिवार्य होती है। यह सरकार का टैक्स है जो दस्तावेज़ों को कानूनी मान्यता देता है। बिना इस पेमेंट के आपका कागज़ काम नहीं करेगा और अदालत में भी इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कब लगती है स्टैम्प ड्यूटी?
मुख्य तौर पर दो परिस्थितियों में यह शुल्क देना पड़ता है:
- रियल एस्टेट लेन‑देन: घर, फ्लैट या जमीन खरीदते समय मूल्य के एक प्रतिशत के हिसाब से स्टैम्प ड्यूटी लगती है। प्रत्येक राज्य की दर अलग‑अलग होती है, कुछ जगह 5% तक भी हो सकती है।
- अन्य कानूनी दस्तावेज़: शेयर ट्रांसफर, बांड इश्यू या लीज एग्रीमेंट जैसे कागज़ों पर भी यह लागू होता है। यहाँ अक्सर फिक्स्ड रेट या छोटे प्रतिशत होते हैं।
ध्यान रखें कि ड्यूटी की गणना में ‘डिमैंड प्राइस’ यानी बाजार मूल्य को माना जाता है, न कि आपका ऑफ़र कीमत। इसलिए अगर आप कम दर पर खरीदते हैं तो भी हाई स्टैम्प ड्यूटी देनी पड़ेगी।
कैसे बचें या घटाएँ स्टैम्प ड्यूटी?
स्टैम्प ड्यूटी को पूरी तरह से टालना मुश्किल है, लेकिन आप कुछ उपायों से इसका बोझ कम कर सकते हैं:
- सही समय चुनें: कई राज्य में वित्तीय वर्ष के अंत या नई नियमों के लागू होने से पहले लेन‑देन करने पर छूट मिलती है।
- रिवर्स चार्जिंग मॉडल देखें: कुछ राज्यों ने ‘ट्रांसफर प्राइस’ को घटाकर ड्यूटी कम करने की सुविधा दी है, जहाँ खरीदार और विक्रेता दोनों के बीच सहमत कीमत तय होती है।
- डिपेंडेंट प्रॉपर्टी का उपयोग करें: यदि आप पहले से किसी संपत्ति के मालिक हैं, तो नई प्रॉपर्टी को मौजूदा पर नाम बदलने से कुछ मामलों में ड्यूटी कम हो सकती है।
- ऑनलाइन कैलकुलेटर इस्तेमाल करें: हर राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर स्टैम्प ड्यूटी कैलकुलेटर मौजूद है। इससे आप पहले से ही अनुमान लगाकर बजट बना सकते हैं, जिससे बाद में आश्चर्य नहीं होगा।
- प्रोफेशनल मदद लें: रियल एस्टेट एजेंट या टैक्स कंसल्टेंट की सलाह लेना फायदेमंद रहता है। वे आपके लेन‑देन के अनुसार सबसे कम ड्यूटी वाले विकल्प सुझा सकते हैं।
इन टिप्स को अपनाकर आप न सिर्फ पैसे बचा पाएंगे, बल्कि लेन‑देन में आने वाली देरी और कानूनी परेशानियों से भी दूर रहेंगे। याद रखें, स्टैम्प ड्यूटी एक बार का खर्च है, इसलिए सही योजना बनाना ज़रूरी है।
यदि आप अभी प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले अपनी राज्य की आधिकारिक साइट पर ‘स्टैम्प ड्यूटी रेट्स’ देख लें और ऊपर बताए गए बचाव उपायों को लागू करें। इस तरह आपका निवेश सुरक्षित रहेगा और अतिरिक्त टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा।