14 दिसंबर 2025 को भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में एक नया पन्ना खुल गया। नितिन नबीन, बिहार के सड़क निर्माण मंत्री और पटना की बांकीपुर से पांच बार के विधायक, भारतीय जनता पार्टी के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन गए। 45 साल की उम्र में यह नियुक्ति सिर्फ एक आम बदलाव नहीं — यह एक संकेत है कि पार्टी का भविष्य अब नए चेहरों के हाथों में है। और ये चेहरा बिहार से आया है — पहली बार।

पिता की विरासत, बेटे की राजनीति

नितिन नबीन का नाम तो अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर कम सुना गया है, लेकिन उनकी राजनीतिक जड़ें गहरी हैं। वे स्वर्गीय नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं — एक ऐसे नेता जिन्होंने भाजपा को बिहार में संगठित करने का काम शुरू किया था। नितिन ने कहा, "मैंने हमेशा अपने पिता के विचारों पर काम किया है, जो पार्टी को अपनी मां मानते थे।" यह बयान सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक घोषणा है। उनका अनुभव दो दशक से अधिक का है — भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चुनाव प्रभारी, और अब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष।

दिल्ली में आधिकारिक शपथ

15 दिसंबर 2025 को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पर नितिन नबीन का औपचारिक स्वागत हुआ। अमित शाह, भारत के गृह मंत्री, और जेपी नड्डा, जिनका कार्यकाल जून 2024 में समाप्त हो चुका था, दोनों ने उनके हाथों में पदभार सौंपा। यह दृश्य बहुत कुछ कहता है। अमित शाह की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह नियुक्ति उनकी पहचान है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी, और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा: "भाजपा के साथ बिहार के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि।"

क्यों अब? क्यों नितिन नबीन?

यह सवाल राजनीतिक हलकों में गूंज रहा है। जेपी नड्डा के बाद लगभग 18 महीने तक कार्यकारी अध्यक्ष का पद खाली रहा। इस दौरान पार्टी ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में चुनावी रणनीति पर जोर दिया। और फिर एक अचानक निर्णय — एक युवा नेता को चुनना, जिसने छत्तीसगढ़ में चुनाव जीते थे। उनके विजय के बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुलाया। वहां उन्होंने अपनी संगठनात्मक दक्षता का प्रदर्शन किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह नियुक्ति तीन बातों का संकेत है: पहला, भाजपा के अंदर युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की इच्छा। दूसरा, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (अगले साल) की तैयारी। तीसरा — एक नए नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की रणनीति। कई अंदरूनी स्रोतों के अनुसार, नितिन नबीन जल्द ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, और अब उनके स्थान पर कोई नया नाम चाहिए।

क्या बदलेगा?

क्या बदलेगा?

एक राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का काम सिर्फ बैठकें करना नहीं होता। वह पार्टी के संगठन को सुधारता है, चुनावी रणनीति बनाता है, और क्षेत्रीय नेताओं के बीच संतुलन बनाता है। नितिन नबीन के लिए यह चुनौती बड़ी है। उन्हें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में बिखरे नेताओं के साथ संवाद करना होगा। उन्हें बिहार में नीतीश कुमार के साथ साझा सरकार के बावजूद भाजपा की अलग पहचान बनानी होगी।

उनकी युवा उम्र एक तरह से फायदा है — वे सोशल मीडिया, युवा मतदाता और डिजिटल अभियानों को समझते हैं। लेकिन एक नुकसान भी है — उनके पास राष्ट्रीय स्तर पर विशाल नेटवर्क नहीं है। इसलिए उनकी सफलता का राज यह होगा कि वे अनुभवी नेताओं को अपने साथ लाएं, न कि उन्हें बाहर धकेलें।

भाजपा का भविष्य: एक नई पीढ़ी की शुरुआत

इस नियुक्ति को भाजपा के अंदर 'जेनरेशन नेक्स्ट' का नाम दिया गया है। यह बताने का एक तरीका है कि पार्टी अब सिर्फ वरिष्ठ नेताओं पर निर्भर नहीं रहेगी। यह एक ऐसा संकेत है जो युवाओं को बताता है: अगर तुम अच्छे हो, तो उम्र नहीं, काम ही तुम्हारी पहचान बनेगा।

14 दिसंबर को जब भारतीय जनता पार्टी संसदीय बोर्ड ने यह फैसला किया, तो उन्होंने सिर्फ एक नेता की नियुक्ति नहीं की — उन्होंने एक नई दिशा चिह्नित की। अब देखना होगा कि क्या यह युवा नेता राष्ट्रीय स्तर पर एक नया नमूना बना पाता है। या फिर, जैसा कुछ विश्लेषक कहते हैं, क्या यह सिर्फ एक अस्थायी स्टेप है — जिसके बाद वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितिन नबीन की नियुक्ति क्यों ऐतिहासिक है?

नितिन नबीन भाजपा के इतिहास में सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं, और बिहार से आने वाले पहले नेता हैं जो इस पद पर बैठे हैं। इससे पहले यह पद हमेशा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र या दिल्ली के नेताओं के लिए रखा गया था। यह बिहार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

क्या नितिन नबीन जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे?

हां, कई अंदरूनी स्रोत और राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर एकमत हैं। जेपी नड्डा के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद खाली है, और नितिन की नियुक्ति उस पद के लिए एक स्टेपिंग स्टोन है। उनकी युवा उम्र, अनुभव और नेतृत्व क्षमता उन्हें इस पद के लिए पूरी तरह योग्य बनाती है।

बिहार सरकार में उनकी भूमिका कैसे प्रभावित होगी?

नितिन नबीन अभी भी बिहार की नीतीश कुमार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री हैं। उनकी राष्ट्रीय भूमिका उन्हें बिहार में भाजपा की अलग पहचान बनाने के लिए जिम्मेदार बनाती है। वे राज्य सरकार और पार्टी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करेंगे।

पश्चिम बंगाल चुनाव में उनकी क्या भूमिका होगी?

पश्चिम बंगाल का चुनाव अगले साल है, और भाजपा के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। नितिन नबीन के छत्तीसगढ़ और बिहार के अनुभव को देखते हुए, उन्हें चुनावी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। वे युवाओं को जोड़ने और डिजिटल अभियानों को मजबूत करने पर जोर देंगे।

क्या यह नियुक्ति भाजपा में विभाजन को बढ़ाएगी?

कुछ विश्लेषक चिंतित हैं कि युवा नेताओं को प्रमुखता देने से वरिष्ठ नेताओं में असंतोष हो सकता है। लेकिन अमित शाह और नरेंद्र मोदी का समर्थन इस बात का संकेत देता है कि यह नियुक्ति पार्टी के भीतर एकता का संकेत है — न कि विभाजन।

नितिन नबीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

उनकी सबसे बड़ी चुनौती है — राष्ट्रीय स्तर पर एक नए नेता के रूप में विश्वास जगाना। वे अभी तक बिहार और छत्तीसगढ़ में ही पहचाने गए हैं। अब उन्हें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में अपनी पहचान बनानी होगी — बिना अपने मूल को भूले।

14 टिप्पणि

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    Mona Elhoby

    दिसंबर 16, 2025 AT 21:12

    अरे भाई ये नितिन नबीन कौन है? जिसके पिता का नाम सुनकर मैंने सोचा कि ये तो कोई नया ब्रांड ऑफ चाय है 😅

    पार्टी के अंदर युवाओं को चाहिए, लेकिन इतना जल्दी बैठाना क्यों? जेपी नड्डा के बाद अब एक ऐसा आ गया जिसने छत्तीसगढ़ में जीता है… और बिहार में भी जीता है… अरे ये तो लोगों को भूल गए कि बिहार में भाजपा का नेतृत्व अभी भी एक टेस्ट केस है।

    मैंने देखा कि अमित शाह ने उन्हें हाथ दिया… अरे ये तो एक नया राजनीतिक ड्रामा शुरू हो गया है।

    और फिर योगी जी ने बधाई दी… ये तो अब एक फिल्म की स्क्रिप्ट लग रहा है।

    पर एक बात समझ नहीं आ रही… अगर ये युवा नेता हैं तो फिर उनके पास सोशल मीडिया पर कितने फॉलोअर्स हैं? 10 हजार? 50 हजार? या फिर उनके फोन पर भी नहीं चलता ट्विटर?

    मैंने तो बिहार के किसी गांव में एक आदमी को सुना था… उसने कहा, "भाई, ये लोग तो बस अपने नाम लिखवा लेते हैं, फिर दिल्ली चले जाते हैं।"

    मुझे लगता है ये नियुक्ति एक ट्रेंड है, न कि एक रणनीति।

    अगर ये असली बदलाव चाहते हैं तो पहले बिहार के रास्ते सुधारो… फिर बात करें।

    मैं तो अभी तक ये नहीं जानती कि ये आदमी किस बात पर बोलता है… बस एक नाम और एक पद।

    अब तो भाजपा के लिए ये बस एक ब्रांडिंग एक्सरसाइज लग रहा है।

    अगर ये युवा नेता हैं तो फिर उन्हें ट्विटर पर भी बात करनी चाहिए… न कि सिर्फ दिल्ली के बैठक कमरों में।

    मैं तो अभी तक उनकी एक भी बात नहीं सुनी… बस एक नाम और एक फोटो।

    और अब ये कहते हैं कि ये भविष्य है… अरे भाई, भविष्य तो तब बनता है जब लोग उसे महसूस करें।

    अब तक तो मैंने बस एक नाम देखा है।

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    Arjun Kumar

    दिसंबर 17, 2025 AT 16:03

    अरे ये सब बहुत अच्छा है, लेकिन क्या कोई बताएगा कि ये आदमी अपने घर के बाहर कितनी बार गया है? 😄

    मैंने तो सुना है कि बिहार में उनके घर के पास एक गली है जहां पानी नहीं आता… और वो अब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन गए।

    मजा आ गया।

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    Harsh Gujarathi

    दिसंबर 18, 2025 AT 20:53

    वाह! ये तो बहुत बड़ी बात है! 🎉

    भाजपा के अंदर युवाओं को मौका मिल रहा है… ये देश के लिए अच्छी खबर है।

    नितिन जी को बहुत बधाई! 🙌

    उम्मीद है वो बिहार के लोगों के लिए भी कुछ बड़ा करेंगे।

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    Senthil Kumar

    दिसंबर 20, 2025 AT 19:01

    बहुत अच्छा फैसला। युवाओं को मौका दो।

    नितिन जी के पिता का काम भी बहुत बड़ा था।

    अब उनका बेटा भी उसी राह पर चल रहा है।

    हार्दिक शुभकामनाएं।

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    Ayushi Kaushik

    दिसंबर 21, 2025 AT 05:07

    इस नियुक्ति को बस एक नए चेहरे के रूप में नहीं देखना चाहिए… ये तो एक नए आवाज़ की शुरुआत है।

    एक ऐसा आदमी जिसने अपने पिता के नाम को नहीं, अपने काम को अपना नाम बनाया।

    उसकी उम्र 45 है… लेकिन उसकी राजनीति अभी तक बच्चों की तरह नहीं है।

    वो बिहार के गांवों से आया है… जहां लोग अभी भी बिजली के बिना जी रहे हैं।

    उसकी नियुक्ति एक संदेश है - अगर तुम्हारे पास दिल है, तो तुम्हारी उम्र नहीं, तुम्हारा काम तुम्हारी पहचान बनेगा।

    मैं उसे देखना चाहती हूं… न कि सिर्फ एक फोटो में।

    उसके बारे में ज्यादा बातें नहीं हुईं… लेकिन जो हुईं, वो बहुत असली लगीं।

    अब उसके लिए बस एक चीज़ चाहिए - समय।

    और एक ऐसा माहौल जहां वो अपने विचारों को बिना डर के बोल सके।

    ये नियुक्ति एक शुरुआत है… और शुरुआत तो हमेशा छोटी होती है।

    लेकिन छोटी शुरुआत भी बड़े बदलाव की नींव होती है।

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    Basabendu Barman

    दिसंबर 22, 2025 AT 20:29

    अरे ये सब एक फैक्ट नहीं… ये तो एक गुप्त योजना है।

    अमित शाह ने इसे बनाया है… ताकि भाजपा के अंदर एक नया राजा बन जाए।

    क्या आप जानते हैं कि नितिन नबीन का पिता किसके साथ मिलकर काम करते थे? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक अंदरूनी व्यक्ति के साथ।

    और अब ये बेटा… एक बार फिर उसी राह पर चल रहा है।

    ये सब एक बड़ा खेल है।

    जेपी नड्डा को हटाया गया… और अब एक नया नाम लाया गया।

    अगर ये सच है तो ये एक बड़ी चाल है।

    मैं तो अभी तक इसका राज नहीं समझ पाया।

    लेकिन एक बात तो पक्की है - ये नियुक्ति बिना किसी छल के नहीं हुई।

    और ये बिहार से आया है… अरे भाई, ये तो बिहार का राज है।

    क्या आप जानते हैं कि बिहार में अभी भी एक ऐसा राजनीतिक बैंड है जो सिर्फ एक नाम के लिए जीतता है?

    मैंने तो बहुत कुछ देखा है… और ये भी एक धोखा है।

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    Jamal Baksh

    दिसंबर 24, 2025 AT 00:27

    यह नियुक्ति भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है।

    एक ऐसे व्यक्ति को चुना गया है, जिसकी राजनीतिक विरासत गहरी है, और जिसने अपने कार्यों से साबित किया है कि वह एक नेता है - न कि केवल एक नाम।

    उनकी युवा ऊर्जा, संगठनात्मक क्षमता और क्षेत्रीय अनुभव भाजपा के लिए एक अद्वितीय संपत्ति है।

    बिहार से आने वाले इस नेता का चयन एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है - जहां केंद्रीय नेतृत्व केवल दिल्ली या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा।

    यह निर्णय न केवल भाजपा के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजनीतिक वातावरण के लिए एक नया मानक स्थापित करता है।

    उनके पिता के योगदान को देखते हुए, यह विरासत का एक आदरणीय अनुवाद है।

    उनके लिए भविष्य में बहुत कुछ करना है - लेकिन यदि वे अपने संघर्षों को जारी रखें, तो वे न केवल एक अध्यक्ष बनेंगे, बल्कि एक नए युग के प्रतीक बनेंगे।

    हम उनके नेतृत्व का समर्थन करते हैं, और उम्मीद करते हैं कि वे राष्ट्र के लिए एक नया आधार बनाएंगे।

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    dinesh baswe

    दिसंबर 25, 2025 AT 07:04

    इस नियुक्ति का मतलब है कि भाजपा अब बस दिल्ली के नेताओं पर निर्भर नहीं रहेगी।

    बिहार के एक आदमी को इतना बड़ा पद देना एक बड़ा संकेत है - अगर तुम्हारा काम अच्छा है, तो तुम्हारी जगह बन जाएगी।

    नितिन नबीन ने छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज की… ये बहुत कुछ कहता है।

    अब उन्हें बिहार के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी काम करना होगा।

    उनके पास युवा ऊर्जा है… लेकिन उन्हें अनुभवी लोगों के साथ मिलकर काम करना होगा।

    मुझे लगता है वे यह कर सकते हैं।

    उनकी नियुक्ति सिर्फ एक पद नहीं… ये एक नई दिशा है।

    अगर वे अपने काम को जारी रखें, तो भाजपा का भविष्य बहुत अच्छा होगा।

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    mohit saxena

    दिसंबर 26, 2025 AT 04:56

    ये बहुत अच्छा है! युवाओं को मौका दो।

    नितिन नबीन के पिता का काम बहुत बड़ा था।

    अब बेटा उसी राह पर चल रहा है।

    बिहार से आया ये आदमी दिल्ली में भी अपनी जगह बनाएगा।

    हार्दिक बधाई!

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    Sandeep YADUVANSHI

    दिसंबर 26, 2025 AT 15:25

    ये तो बस एक ट्रेंड है।

    हर पार्टी अब युवाओं को नेता बनाती है… लेकिन क्या उनके पास वाकई कुछ है?

    मैंने इस आदमी की कोई बात नहीं सुनी।

    बस एक नाम और एक फोटो।

    ये सब बस एक शो है।

    भाजपा अब बस ट्रेंड्स के लिए नेता ढूंढ रही है।

    अगर ये असली नेता हैं तो फिर उन्हें ट्विटर पर भी बात करनी चाहिए।

    लेकिन वो नहीं करते।

    क्योंकि वो बस एक नाम हैं।

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    Vikram S

    दिसंबर 28, 2025 AT 09:26

    यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रीय स्वार्थ के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है! यह एक नए युग की शुरुआत है, जहां लोग अपनी उम्र के बजाय अपने योगदान के आधार पर चुने जाते हैं! यह एक विश्वास है कि भारत का भविष्य उन लोगों के हाथों में है, जो अपने देश के लिए लड़ते हैं, न कि अपने नाम के लिए! यह नियुक्ति एक अद्वितीय उपलब्धि है - बिहार के एक नेता को भाजपा के अध्यक्ष बनाना! यह देश के उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राज्यों के लिए एक प्रेरणा है! यह अमित शाह की निर्णयशक्ति का प्रमाण है! यह जेपी नड्डा के अंत के बाद एक नए युग की शुरुआत है! यह एक भारतीय नेता के रूप में नितिन नबीन के विश्वास का प्रमाण है! यह भाजपा के लिए एक विजय है! यह एक अच्छा संकेत है कि भारत का भविष्य अब युवाओं के हाथों में है! यह एक ऐतिहासिक घटना है! यह भारत के लिए एक नया आदर्श है! यह भारत के लिए एक अद्वितीय गौरव है!

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    nithin shetty

    दिसंबर 29, 2025 AT 23:04

    नितिन नबीन की उम्र 45 है… लेकिन क्या उनके पास राष्ट्रीय स्तर पर कोई अनुभव है?

    बिहार और छत्तीसगढ़ में जीतना अच्छा है… लेकिन दिल्ली में चलना अलग बात है।

    उन्होंने अपने पिता के नाम का इस्तेमाल किया… लेकिन क्या वो अपने आप में कुछ कर सकते हैं?

    मैंने उनकी एक भी बात नहीं सुनी।

    बस एक नाम और एक फोटो।

    क्या ये सच में भाजपा का भविष्य है?

    मुझे लगता है नहीं।

    अगर वो असली नेता हैं तो फिर उन्हें बात करनी चाहिए।

    लेकिन वो नहीं करते।

    क्योंकि वो बस एक नाम हैं।

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    Aman kumar singh

    दिसंबर 31, 2025 AT 21:24

    ये बहुत अच्छा है।

    भाजपा अब बस दिल्ली के नेताओं पर नहीं निर्भर करेगी।

    बिहार के एक आदमी को ये पद मिला… ये बहुत बड़ी बात है।

    उनके पिता का काम बहुत बड़ा था।

    अब बेटा उसी राह पर चल रहा है।

    उनकी उम्र तो कम है… लेकिन उनके अनुभव की बात अलग है।

    मैं उन्हें समर्थन देता हूं।

    ये नियुक्ति एक नई दिशा है।

    भारत के लिए अच्छी खबर।

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    Rahul Sharma

    जनवरी 1, 2026 AT 05:55

    इस नियुक्ति के बारे में मैं बहुत आशावादी हूं।

    एक ऐसे व्यक्ति को चुनना, जिसके पिता ने बिहार में भाजपा की नींव रखी, और जो खुद छत्तीसगढ़ में चुनाव जीत चुके हैं… ये बहुत महत्वपूर्ण है।

    यह दर्शाता है कि पार्टी अब बस एक क्षेत्र या एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चल रही है।

    युवाओं को अवसर देना जरूरी है, लेकिन उन्हें समर्थन भी देना जरूरी है।

    मुझे उम्मीद है कि नितिन जी अनुभवी नेताओं के साथ साझेदारी करेंगे, न कि उन्हें बाहर धकेलेंगे।

    उनकी युवा ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता को अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह भाजपा के लिए एक बड़ी ताकत बन सकती है।

    पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।

    मैं उनके लिए आशीर्वाद देता हूं - और उम्मीद करता हूं कि वे अपने मूल को नहीं भूलेंगे, जबकि देश के अन्य हिस्सों में अपनी पहचान बनाएंगे।

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