बुद्ध जयन्ती – क्या है खास और क्यों होते हैं ये जश्न?
हर साल बुद्ध के जन्मदिवस को भारतीय धरती पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लोग इस दिन गंगा किनारे, बौद्ध स्तूपों या मंदिरों में इकट्ठा होते हैं, मोमबत्ती जलाते हैं और शांति की बातें सुनते‑सुनते अपने दिल को साफ़ कर लेते हैं। अगर आप पहली बार यहाँ आए हैं तो समझ लीजिए कि यह सिर्फ एक त्योहारी दिन नहीं, बल्कि आत्म‑जागरूकता का अवसर है।
बुद्ध जयन्ती का इतिहास – कब और क्यों?
बुद्ध के जन्म की सही तिथि पर बहुत बहस रही, लेकिन अधिकांश बौद्ध ग्रंथों में कहा गया है कि वह 8वें महीने की अष्टमी को जन्मे थे। इस दिन को “वेसाक” या “बुद्ध पवन” कहा जाता है। भारत में यह त्योहारी रूप से मनाने का चलन शताब्दियों पुराना है, जब पहली बार बौद्ध मठों ने धम्म प्रवचन के साथ ही संगीत और नृत्य भी जोड़ दिया। समय‑के‑साथ ये समारोह गाँव‑गाँव तक पहुँचा और आज हर कोने में अलग‑अलग रूप में देखे जा सकते हैं।
आज के समय में बुद्ध जयन्ती कैसे मनाई जाती है?
अब तो सोशल मीडिया पर भी इस दिन की धूम दिखती है। लोग अपने घरों को सफेद या पीले रंग से सजाते हैं, फूल चढ़ाते हैं और दान‑पुत्रियों का आयोजन करते हैं। कई शहरों में बड़ी रैली होती है जहाँ बौद्ध पुजारी शांति‑धर्म के संदेश देते हैं। अगर आप कहीं बाहर रहते हैं तो स्थानीय बौद्ध सेंटर या ग़ुरुद्वारा से संपर्क करके कार्यक्रम की जानकारी ले सकते हैं।
बुद्ध जयन्ती पर खास बात यह भी है कि कई लोग इस दिन योग, प्राणायाम और ध्यान सत्रों में हिस्सा लेते हैं। ऐसा करने से मन शांति पाता है और तनाव कम होता है। अगर आप पहली बार ट्राई कर रहे हैं तो सिर्फ पाँच‑सात मिनट के लिए आँखें बंद करें, गहरी साँस लें और धम्म के कुछ छोटे वचन दोहराएँ – “अहिंसा परमो धर्म” जैसा कोई वाक्य।
भोजन की बात करें तो इस दिन शाकाहारी पकवानों का चलन है। दाल‑चावल, सादा सब्ज़ी और फल मिठाई के रूप में होते हैं। कई बौद्ध मठों में “वेजी फेस्ट” भी आयोजित होता है जहाँ सभी को पौष्टिक खाने की पेशकश की जाती है। यह न केवल शरीर को हल्का रखता है बल्कि पर्यावरण पर भी अच्छा असर डालता है।
यदि आप इस अवसर का सही मतलब निकालना चाहते हैं तो सबसे आसान तरीका यही है कि अपने आस‑पास के लोगों से बात करें, उनके साथ धम्म के बारे में चर्चा करें और छोटी‑छोटी दया की बातें अपनाएँ। इस तरह न सिर्फ आपका मन प्रसन्न होगा बल्कि आपके रिश्ते भी मजबूत होंगे।
आखिर में, बुद्ध जयन्ती हमें सिखाती है कि जीवन को सरल रखें, अहिंसा अपनाएँ और हमेशा सीखते रहें। चाहे आप किसी भी धर्म के हों, यह दिन सभी को एकजुट कर सकता है। तो इस साल की बुद्ध पवन पर अपने मन को शांति दें और छोटे‑छोटे अच्छे कामों से अपना दिन खास बनाएं।