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21 जून 2026 को होने वाले NEET-UG रि-एग्जाम के लिए सरकार ने 'फूल-प्रूफ' व्यवस्था का दावा किया है। नई दिल्ली में बुधवार को हुई बैठक में केंद्रीय अधिकारियों ने संसदीय स्थायी समिति को आश्वासन दिया कि इस बार परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। यह वादा तब आया जब मई की परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों के भविष्य को उजाड़ दिया था।
बैठक का माहौल गंभीर था। एक तरफ सरकार का दावा था कि अब कोई चूक नहीं होगी, तो दूसरी ओर समिति के सदस्यों ने पूछा कि पिछली बार ऐसा क्यों हुआ? यहीं बात है, रामगोपाल यादव, अध्यक्ष of स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसदीय स्थायी समिति ने एजेंसियों से सीधा सवाल किया। वे जानना चाहते थे कि क्या सिर्फ तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने से काम चल जाएगा, या फिर प्रणाली में मौलिक बदलाव की जरूरत है?
सरकार का 'अभेद्य' इंतजाम का दावा
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सामने यह तर्क रखा कि 21 जून की परीक्षा के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती गई हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को 'अभेद्य' बनाया गया है। लेकिन, समिति के कुछ सदस्यों ने इस दावे पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पिछले साल भी ऐसे ही दावे किए गए थे, फिर भी 3 मई 2026 को आयोजित मुख्य परीक्षा में गड़बड़ी सामने आई थी।
विशेष रूप से, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के प्रतिनिधियों से पूछा गया कि पेपर लीक कैसे हुआ और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। हालांकि, बैठक के विवरण में इन सवालों के विस्तृत उत्तर शामिल नहीं हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि समिति संतुष्ट होना चाहती है।
छात्रों का मानसिक दबाव और आत्महत्या की घटनाएं
इस बहस के पीछे एक गहरा मानवीय पहलू है। पेपर लीक के बाद देश भर में छात्रों में तनाव बढ़ गया है। कई मामलों में आत्महत्या की खबरें आई हैं, जिससे समिति चिंतित है। समिति के सदस्यों ने कहा कि जब एक ही परीक्षा पर पूरे वर्ष का भविष्य निर्भर होता है, तो उस दबाव का कोई हिसाब नहीं होता।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने इसे केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में देखा। जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, तो मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल टूटता है। इसलिए, समिति का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को न केवल सुरक्षित, बल्कि छात्र-अनुकूल भी बनाना होगा।
साल में दो या तीन बार NEET? समिति का सुझाव
यहाँ एक महत्वपूर्ण मोड़ आता है। संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि NEET-UG परीक्षा साल में केवल एक बार के बजाय दो या तीन बार आयोजित की जाए। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य छात्रों पर पड़े अत्यधिक मानसिक दबाव को कम करना है।
समिति का तर्क है कि यदि परीक्षा बार-बार होती है, तो किसी एक दिन की गड़बड़ी या बीमारी के कारण छात्र का पूरा साल बर्बाद नहीं होगा। वे चीन और अमेरिकी परीक्षा मॉडल का हवाला दे रहे हैं, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित परीक्षाओं के लिए वैकल्पिक अवसर दिए जाते हैं। इससे न केवल दबाव कम होगा, बल्कि पेपर लीक जैसी स्थिति में भी प्रणाली पर विश्वास बना रहेगा।
जांच और जिम्मेदारियां: CBI और NTA के लिए चेतावनी
समिति ने केंद्रीय Bureau of Investigation (CBI) और NTA के अधिकारियों को समन किया है। उन्हें पेपर लीक मामले की जांच की प्रगति, जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और भविष्य की सुरक्षा उपायों पर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।
सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति ने NTA के प्रमुख से सीधे सवाल किए। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जांच में कौन से नाम सामने आए हैं। यह अस्पष्टता छात्रों और अभिभावकों में असंतोष का कारण बन रही है।
21 जून की परीक्षा: क्या है हालिया स्थिति?
NTA ने घोषणा की है कि 21 जून 2026 को रि-एग्जाम ऑफलाइन, पेन-पेपर मोड में ही होगा। परीक्षा के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उम्मीदवारों के लिए एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर दी गई है, और शीघ्र ही एडमिट कार्ड भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
- एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र का पता, शिफ्ट टाइमिंग और सेंटर कोड शामिल होगा।
- उम्मीदवार अपने रोल नंबर और पासवर्ड से कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस परीक्षा की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं, जो इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
21 जून को NEET रि-एग्जाम का फॉर्मेट क्या होगा?
21 जून 2026 को आयोजित होने वाला NEET-UG रि-एग्जाम ऑफलाइन पेन-पेपर मोड में ही होगा। NTA ने पुष्टि की है कि परीक्षा के स्वरूप या पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह परीक्षा पूर्ण रूप से पारंपरिक तरीके से ली जाएगी।
क्या NEET परीक्षा साल में एक से ज्यादा बार होगी?
हाल ही में हुई संसदीय समिति की बैठक में सुझाव दिया गया है कि NEET-UG परीक्षा साल में दो या तीन बार आयोजित की जानी चाहिए। इसका उद्देश्य छात्रों पर पड़े मानसिक दबाव को कम करना और एक बार की गड़बड़ी से पूरे वर्ष को बर्बाद होने से बचाना है। हालांकि, यह अभी एक सुझाव है और सरकार द्वारा इसे लागू करने की घोषणा नहीं हुई है।
पेपर लीक मामले में जांच की स्थिति क्या है?
संसदीय समिति ने CBI और NTA के अधिकारियों को समन किया है ताकि वे पेपर लीक मामले की जांच की प्रगति और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान पर स्पष्टीकरण दें। समिति ने सख्त रुख अपनाया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदमों की मांग की है। विस्तृत जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड कब आएंगे?
NTA ने बताया है कि एग्जाम सिटी स्लिप पहले ही जारी कर दी गई है। उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड शीघ्र ही जारी किए जाएंगे, जिन्हें वे NTA की आधिकारिक वेबसाइट से अपने रोल नंबर और पासवर्ड का उपयोग करके डाउनलोड कर सकेंगे। इन कार्डों में परीक्षा केंद्र का सटीक पता और अन्य आवश्यक निर्देश शामिल होंगे।
कमल कमल
जून 17, 2026 AT 00:51सच तो यह है कि हमारी सरकार हर बार 'फूल-प्रूफ' का दावा करती है, लेकिन जमीन पर क्या होता है, यह सबको पता है। 😒 मुझे लगता है कि ये सारा शोर बस मीडिया के लिए है। असली खेल पीछे चल रहा है। जब तक सिस्टम में मौलिक बदलाव नहीं होगा, ये री-एग्जाम भी वही गड़बड़ी लेकर आएगा। लोग सोचते हैं कि NTA अब सीख गया है, लेकिन मेरे अनुभव से ऐसा नहीं है। वे अपनी जगह सुरक्षित रखना चाहते हैं, छात्रों की चिंता उन्हें नहीं है। इसलिए मैं कहूंगा कि इस बार भी वही नटखटिया देखने को मिलेगी।
harsh gupta
जून 17, 2026 AT 18:05हा हा! देखो कैसे वे 'पारदर्शिता' का नाटक कर रहे हैं। 😂 असल में यह एक बड़ा सा षड्यंत्र है ताकि जो लोग पैसे देकर प्रश्नपत्र खरीद सकते हैं, उनके लिए रास्ता साफ रहे। सामान्य छात्र जो मेहनत करते हैं, उनका भविष्य बेकार हो जाता है। यह सिस्टम ही ऐसे डिजाइन किया गया है कि अमीर और ताकतवर ही जीतें।
Mukesh Katira
जून 19, 2026 AT 15:27यह केवल एक परीक्षा नहीं है, यह समाज की नीतिगत विफलता का प्रतिबिंब है। जब हम शिक्षा को केवल एक प्रतिस्पर्धात्मक खेल बना देते हैं, तो नैतिक मूल्य धुंधले पड़ जाते हैं। हमें यह समझना होगा कि मानव जीवन की कीमत कुछ अंक नहीं हैं। यदि प्रणाली इतनी भ्रष्ट है कि वह पारदर्शी होने का दिखावा कर सकती है, तो उसकी नींव ही कमजोर है। हमें अपने दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है।
Roop Kaur
जून 20, 2026 AT 02:46मेरा मानना है कि यह पूरी घटना एक बहुत बड़े साजिश का हिस्सा है। वे जानबूझकर तनाव पैदा कर रहे हैं ताकि छात्रों का मनोबल टूटे। जब आप डरे हुए होते हैं, तो आप आसानी से नियंत्रित हो जाते हैं। यह सिर्फ NEET नहीं है, यह हमारे युवाओं के दिमाग को धोखा देने की कोशिश है। हमें जागृत रहना चाहिए और इन बातों को गहराई से समझना चाहिए।
Ankita Bajaj
जून 20, 2026 AT 09:39चलो सकारात्मक रहते हैं! 🌟 हाँ, स्थिति कठिन है, लेकिन हार मत मानो। तुम सब मेहनत कर रहे हो और यह महत्वपूर्ण है। सरकार ने सुझाव दिए हैं कि साल में दो या तीन बार परीक्षा होगी, यह एक अच्छा कदम है। इसे अपनाओ और अपनी तैयारी जारी रखो। तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है, बस विश्वास रखो। 💪
Manish gupta
जून 21, 2026 AT 16:42अरे वाह! अब तो सचमुच थिएटर शुरू हो गया है। 😏 ये सब 'संसदीय समिति' और 'CBI' के नाम पर बस शो है। असली जिम्मेदार कोई नहीं है, सब भाग निकल गए हैं। और अब वे कह रहे हैं कि परीक्षा 'अभेद्य' है? हंसी आ रही है। ये लोग हमें बच्चे समझ रहे हैं।
Sanjay Kumar
जून 23, 2026 AT 11:25मुझे लगता है कि हमें इस परिस्थिति को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। जीवन में चुनौतियां आती हैं, और यह हमें मजबूत बनाती हैं। हालांकि व्यवस्था में खामी हैं, लेकिन हम अपनी मेहनत और ईमानदारी से आगे बढ़ सकते हैं। संयम बनाए रखो और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करो।
Gaurav Jangid
जून 24, 2026 AT 13:09ओह माई गॉड!!! 😱😱😱 क्या हालत है देश की!! 😭😭 मेरा दिल टूट रहा है देखकर!! 😢😢 ये सब क्यों हो रहा है?? 😡😡 सरकारी अधिकारी तो सो रहे हैं!! 😴😴 और हमारे बच्चे रो रहे हैं!! 😭😭 कभी कभी लगता है कि यह दुनिया पागलों की बन गई है!! 🤪🤪 कृपया कुछ करो!! 🙏🙏 नहीं तो सब खत्म हो जाएगा!! 💔💔
Ghanshyam Gohel
जून 25, 2026 AT 20:06यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है; तथापि, हमें शांत दिमाग से इसका विश्लेषण करना चाहिए। अधिकांश लोग गुस्से में हैं, जो स्वाभाविक है; लेकिन गुस्से से समस्या का समाधान नहीं होता। हमें व्यवस्थित तरीके से अपनी मांगें रखनी चाहिए। यदि हम एकजुट होकर कार्य करें, तो बदलाव संभव है। कृपया भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से बचें और तर्कसंगत बनें।
Nathan Lemon
जून 26, 2026 AT 13:28इस मामले में सांस्कृतिक और संस्थागत दोनों पहलुओं को समझना आवश्यक है। भारतीय संदर्भ में, परीक्षाएं केवल योग्यता का मापदंड नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकृति का भी मार्ग हैं। इसलिए, जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो इसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक भी होता है। हमें वैश्विक मानकों के साथ स्थानीय संवेदनशीलता का संतुलन बनाना होगा।
Abhijit Pawar
जून 27, 2026 AT 11:32बात स्पष्ट है। NTA को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। कोई बहाने नहीं।